वर्ष 35 / अंक - 41 / ज्ञानेश कुमारको इस्तीफा देना होगा

ज्ञानेश कुमारको इस्तीफा देना होगा

ज्ञानेश कुमारको इस्तीफा देना होगा

8 अक्टूबर 2026 को पटना में इंडिया गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर लोकभवन मार्च निकाला. यह मार्च बिहार विधानसभा के सामने सात शहीदों की मूर्ति पर माल्यार्पण के साथ शुरू हुआ. इस शांतिपूर्ण मार्च को पुलिस ने बैरिकेड लगा कर जबरन रोकने का प्रयास किया और प्रदर्शनकारियों के साथ धक्कामुक्की की. कई प्रदर्शनकारियों एवं इंडिया गठबंधन के नेताओं को पुलिस ने डिटेन कर लिया.

लोकभवन मार्च में भाकपा(माले) महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य, राज्य सचिव कुणाल, सांसद राजाराम सिंह, खेग्रामस महासचिव धीरेंद्र झा, ऐपवा महासचिव मीना तिवारी, विधान पार्षद शशि यादव, विधायक संदीप सौरभ व अरुण सिंह तथा पूर्व विधायक सत्यदेव राम, गोपाल रविदास, अजीत कुशवाहा पूर्व विधायक एवं पार्टी कार्यकर्ता शामिल हुए.

प्रदर्शन के दौरान भाकपा(माले) के पूर्व विधायक व आरवाईए के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत कुशवाहा पुलिसिया बर्बरता के शिकार हुए और गंभीर चोटों की वजह से उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा.

बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के साथ प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे भाकपा(माले) महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि इंडिया गठबंधन और इस देश का पूरा छात्र-नौजवान ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़कों पर है. ‘वोट चोरी’ देश विरोधी गतिविधि है. इसके लिए ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना होगा. पूरी चुनाव प्रक्रिया पक्षपातपूर्ण है. इसके खिलाफ इंडिया गठबंधन लगातार आवाज उठाता रहा है और एसआइआर को रद्द करने की मांग करता रहा है. आज सच देश के सामने है और पूरा देश इसकी मांग कर रहा है.

मोदी और अमित शाह की जोड़ी चाहे जितनी पुलिसिया बर्बरता कर ले, महिलाओं और छात्रों को गिरफ्तार कर उन पर जितना भी जुल्म ढाए, लेकिन यह लड़ाई रुकने वाली नहीं है. इस देश का चुनाव आयोग ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में नहीं चल सकता है. एसआइआर नागरिकों के उस मताधिकार पर हमला है, जो बाबा साहेब ने संविधान में दिया था. इसे तत्काल रद्द किया जाना चाहिए. देश के राष्ट्रपति भी पद से हट जाएं तो उन पर मुकदमा चल सकता है, लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को आजीवन मुकदमे से छूट दे दी गई है. प्रधानमंत्री मोदी को ज्ञानेश कुमार वोट चोरी में मदद कर रहे हैं और प्रधानमंत्री मोदी मुकदमे से उन्हें मुक्त करके संरक्षण दे रहे हैं. सरकार द्वारा घोषित और आवंटित जंतर-मंतर धरना स्थल पर भी प्रदर्शन नहीं करने दिया जा रहा है. छात्राओं के साथ बदसलूकी की जा रही है.

10 October, 2026