‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 2026’ को चुनौती देते हुए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर में एक याचिका दायर की गई है.
इससे पहले इस अधिनियम को अवैध तथा असंवैधानिक घोषित किए जाने के लिए उच्च न्यायालय बिलासपुर में एक अन्य याचिका भी दायर की गयी थी, जिसमें माननीय न्यायालय ने शासन को 4 हफ्ते में जवाब देने का समय दिया था, किन्तु शासन पक्ष ने अब तक इस प्रकरण में कोई जबाव नहीं दिया है.
ऑल इंडिया पीपल्स फोरम, ऑल इंडिया लाॅयर्स एसोसिएशन फाॅर जस्टिस, एससी एसटी ओबीसी एंड माइनाॅरिटीज संयुक्त मोर्चा, मदनी सोशल वेलफेयर ग्रुप और प्रोग्रेसिव क्रिश्चियन अलायंस समेत कई संगठनों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि यह विषय केवल किसी एक धार्मिक समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता, अंतःकरण की स्वतंत्रता, व्यक्तिगत गरिमा, समानता तथा भारत के संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों से जुड़े व्यापक प्रश्नों को सामने लाता है.
उन्होंने सभी धर्मों-समुदायों के प्रतिनिधियों, नागरिक संगठनों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, अधिवक्ताओं, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा न्याय, स्वतंत्रता और समानता के लिए प्रतिबद्ध नागरिकों से इस महत्वपूर्ण विषय के प्रति सजग रहने तथा संवैधानिक अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता, सामाजिक सद्भाव और हर नागरिक की गरिमा की रक्षा के लिए अपनी एकजुट रहने की अपील की.