– फरजाना महदी
जन संस्कृति मंच का दसवां उत्तर प्रदेश राज्य सम्मेलन 13-14 दिसम्बर 2025 (शनिवार-रविवार) को लखनऊ के नेहरू युवा केंद्र में सम्पन्न हुआ. इसमें राज्य के विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधियों ने वर्तमान सत्ता द्वारा थोपी जा रही विभाजन और दमन की संस्कृति के खिलाफ प्रतिरोध की संस्कृति को मजबूत बनाने का संकल्प लिया. दो दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन उद्घाटन सत्र को अतिथि वक्ताओं, जाने-माने पत्रकार परांजय गुहा ठाकुरता और संस्कृति कर्मी शम्सुल इस्लाम ने संबोधित किया. सम्मेलन में आए अतिथियों और प्रतिनिधियों का स्वागत लखनऊवासियों की ओर से प्रो. रूपरेखा वर्मा ने किया.
अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए प्रो. अवधेश प्रधान ने कहा कि आज सनातन की बहुत बात की जा रही, लेकिन कूपमण्डूक कभी सनातन नहीं हो सकता. सनातन तो वो है जो सदा नया होता रहे. असली सनातन संस्कृति, ज्ञान और विचार की स्वतंत्रता है जो आज सबसे ज्यादा खतरे में है. विचार विमर्श की स्वतंत्रता के बिना विश्वविद्यालय, विश्वविद्यालय नहीं रह जाएंगे. ज्ञान और प्रश्न के देश में सवाल पूछने की मनाही सबसे बड़ी दुर्घटना है.
परांजय गुहा ठाकुरता ने कहा कि आज हम भारत में फासीवाद का एक नया रूप देख रहे हैं. मनमोहन सिंह ने जो क्रोनी पूंजीवाद शुरू किया, वह अब अपना चरम रूप ले चुका है. हवाई अड्डे से बंदरगाह तक और सड़क से रेल तक सरकार के दोस्त पूंजीपतियों को सौंपी जा रही है. हमारी सारी अभिव्यक्ति पर दो अमेरिकी कंपनियों का नियंत्रण है. मोबाइल फोन को हर नागरिक की जासूसी का जरिया बना दिया गया है.
शम्सुल इस्लाम ने कहा कि आज आरएसएस जो कर रहा है वह यही करेगा, यह तो शुरू से पता था. फिर भी उसके लिए रास्ता कांग्रेस ने प्रशस्त किया. आज वंदे मातरम पर चर्चा वो लोग करा रहे हैं जिन्होंने खुद इसे कभी नहीं गाया. इस मुद्दे पर बात करने से पहले सभी लोग एक बार आनंदमठ जरूर पढ़ें जिसमें यह गीत है. यह उपन्यास मुस्लिमों के प्रति घृणा और अंग्रेजी राज स्थापित होने पर संतोष व्यक्त करता है.
प्रो रूपरेखा वर्मा ने कहा कि आज लोकतंत्र आईसीयू में है जहां इलाज के लिए कोई डॉक्टर नहीं है. इस नई चुनौती से पुराने हथियारों से नहीं लड़ा जा सकता. गोष्ठी और सेमिनार काफी नहीं, सड़क पर उतरने की जरूरत है. आज सनातन के नाम पर जो विभाजन किया जा रहा है वह अनंत विभाजन की ओर ले जाएगा.
सम्मेलन में बिरादराना संगठनों ने दमन और विभाजन के मौजूदा राज के खिलाफ जसम के साथ मिलकर लड़ने का भरोसा दिलाया. इप्टा के दीपक कबीर ने कहा कि हमें मिलकर एक साझी रणनीति पर विचार करना चाहिए. जलेस की समीना खान ने कहा कि यह वक्त एक दूसरे का हाथ मजबूती से थाम कर चलने का है. प्रलेस के शकील सिद्दीकी ने कहा कि आज आशंकाएं हैं, खतरे हैं, पर जीत की आशा खत्म नहीं हुई है. उद्घाटन सत्र में आए तमाम लोगों को साहित्यकार शिवमूर्ति ने धन्यवाद ज्ञापित किया.
दूसरा दिन संगठन को मजबूत बनाने पर चर्चा और नई कमेटी के चुनाव के इर्द गिर्द रहा. निवर्तमान कमेटी के सचिव रामनरेश राम के प्रतिवेदन पर हुई बहस में विभिन्न जनपदों से आये करीब दो दर्जन प्रतिनिधियों ने विचार रखे. आज की सांस्कृतिक चुनौतियों के बरक्स आगे के कार्यभार को लेकर अनेक सुझाव आये. इसके उपरांत जसम की नयी राज्य परिषद, कार्यकारिणी तथा पदाधिकारियों का चुनाव हुआ.
‘अभिनव कदम’ पत्रिका के संपादक व आलोचक जयप्रकश धूमकेतु अध्यक्ष तथा कवि कौशल किशोर कार्यकारी अध्यक्ष चुने गए. युवा आलोचक रामनरेश राम को पुनः सचिव तथा कथाकार फरजाना महदी को उप सचिव की जिम्मेदारी दी गई. इन दोनों के अतिरिक्त संस्कृति कर्म के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े छ रचनाकारों – मूर्तिकार धर्मेंद्र कुमार, कथाकार हेमंत कुमार, संस्कृतिकर्मी विनोद सिंह व उदय यादव, पत्रकार अशोक चौधरी तथा संस्कृतिकर्मी निशा. – को उपाध्यक्ष बनाया गया. दीपशिखा, नगीना निशा और अंकित पाठक को सह सचिव की जिम्मेदारी दी गई.
दोनों ही दिन गीत, नज्म समेत कई सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हुईं. इस मौके पर परांजय गुहा ठाकुरता की वोट चोरी और रोचना कुमार की स्त्री शोषण पर फिल्में भी दिखाई गईं. विभिन्न सत्रों का संचालन रामायण राम और शांतम निधि ने किया. परिसर की साज सज्जा में प्रो धर्मेंद्र कुमार, अंकुर, विनीता और लखनऊ आर्ट्स कॉलेज के छात्रों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. सभागार के बाहर इलाहाबाद, गोरखपुर, लखनऊ तथा नवारुण प्रकाशन की ओर से लगाए गए बुक स्टाल पर भी चहल-पहल रही. जसम के इस सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में वक्ताओं को सुनने के लिए बड़ी संख्या में शहर के साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों, संस्कृतिकर्मियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मौजूदगी रही.