धरना-प्रदर्शन कर पार्टी नेताओं की रिहाई की मांग की
उत्तर प्रदेश में भाकपा(माले) ने अपने राज्य सचिव सुधाकर यादव व अन्य नेताओं को हत्या के प्रयास जैसी गंभीर आपराधिक धाराएं लगाकर झूठे मुकदमे में मिर्जापुर में जेल भेजने के खिलाफ 6 जनवरी 2026 को राज्यव्यापी दमन-विरोधी दिवस मनाया.
विरोधी दिवस पर हुए धरना-प्रदर्शन में अन्य वामपंथी दल – माकपा, भाकपा व फॉरवर्ड ब्लॉक भी शामिल हुए. सभी ने एक स्वर से मिर्जापुर में गिरफ्तार भाकपा(माले) के नेताओं-कार्यकर्ताओं की बिना शर्त रिहाई की मांग की.
इस मौके पर प्रदेश के मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन पांच सूत्री मांगों के साथ जिलों में प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा गया.
राजधानी लखनऊ में परिवर्तन चौराहा पर वाम दलों के कार्यकर्ताओं ने सभा कर मार्च निकाला, जो नारे लगाता हुआ कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचा. नेताओं ने अपर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा.
लखनऊ के अलावा मिर्जापुर, भदोही, सोनभद्र, चंदौली, बनारस, बलिया, गोरखपुर, देवरिया, महाराजगंज, मऊ, गाजीपुर, आजमगढ़, प्रयागराज, अयोध्या, रायबरेली, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, मथुरा, कानपुर, जालौन, गोंडा, कुशीनगर व सहारनपुर में भी प्रदर्शन हुए.
इस मौके पर प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि योगी सरकार गरीबों-आदिवासियों के घरों-खेतों पर गैरकानूनी बुलडोजर चला रही है. इसका विरोध करने पर न सिर्फ ग्रामीणों की आवाज को बलपूर्वक दबाया जा रहा है, बल्कि उनके आंदोलन का नेतृत्व करने वाले भाकपा(माले) नेताओं को जेल भेज कर उत्पीड़न किया जा रहा है.
मिर्जापुर में भाकपा(माले) की जिला सचिव व ग्रामीण मजदूरों की लोकप्रिय महिला नेता कामरेड जीरा भारती को जेल भेजने से पहले, दो मौकों पर पुरूष पुलिस ने उनसे मारपीट की. जेल के अंदर भी उनके साथ दुर्व्यवहार हो रहा है. इसका पता तब चला, जब जेल में बंद नेताओं व ग्रामीणों से सोमवार को भाकपा(माले) नेताओं की एक टीम मिली.
भाकपा(माले) राज्य सचिव सुधाकर यादव और मिर्जापुर जिला सचिव जीरा भारती को बीती तीन जनवरी को गिरफ्तार किया गया था. पांच गांव वालों सहित कुल सात व्यक्ति मिर्जापुर जेल में बंद हैं.
आज के राज्यव्यापी विरोध दिवस व ज्ञापन के माध्यम से नेताओं की रिहाई के अलावा जो अन्य मांगें उठाई गईं, उनमें प्रमुख हैं :
मिर्जापुर के लालगंज थाने में तीन जनवरी को दर्ज हुई एफआईआर संख्या 04/2026 निरस्त की जाए. भाकपा(माले) नेताओं को फर्जी फंसाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. महिला नेता कामरेड जीरा भारती से गिरफ्तारी के बाद मारपीट करने वाले पुलिसकर्मी दंडित किये जायें. गिरफ्तार नेताओं-कार्यकर्ताओं के साथ जेल में दुर्व्यवहार बंद हो.
गरीबों के घरों-खेतों पर बुलडोजर चलाना तत्काल रोका जाए. उनकी पुश्तैनी जमीनों से बेदखली रोकी जाए. लालगंज के तेंदुआ खुर्द गांव में गत 2/3 जनवरी की रात महिलाओं पर हमला करने वाले वनकर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई हो. घायल गांव वालों की एफआईआर दर्ज की जाए. आदिवासियों को वनाधिकार कानून के तहत जल, जंगल व जमीन पर अधिकार दिया जाए. वन विभाग व प्रशासन द्वारा किये जा रहे उनके उत्पीड़न पर रोक लगाई जाए.
घटनाक्रम क्या है?
मिर्जापुर में लालगंज थानाक्षेत्र के तेंदुआ खुर्द गांव में विगत कुछ समय से वन विभाग और प्रशासन चार पीढ़ियों से आबाद गरीब आदिवासियों को बेदखल करने की कोशिश कर रहा है. इसे रोकने की मांग को लेकर लालगंज तहसील पर पिछले महीने के मध्य में धरना हुआ था तथा बीती 2 जनवरी 2026 को मंडलायुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन भी किया गया था.
इसके बावजूद, बीती 02/03 जनवरी की रात करीब दो बजे सात जेसीबी लेकर लगभग डेढ़ सौ लोगों के साथ फारेस्ट रेंजर और वन अधिकारी पहुंचे. महिलाओं और लड़कियों से अभद्रता व मारपीट करने लगे. इसका ग्रामीणों ने प्रतिरोध किया.
इसी घटना को लेकर वन विभाग ने लालगंज थाने में एफआईआर (सं. 04/2026, तिथि 3-1-2026) दर्ज कराई है, जिसमें हत्या के प्रयास सहित तमाम गंभीर धाराएं सात नामजद और पचास अज्ञात लोगों के विरुद्ध लगाई गई हैं.
भाकपा(माले) राज्य सचिव कामरेड सुधाकर यादव का नाम एफआईआर में नहीं है, न ही वे मौके पर मौजूद थे, लेकिन उन्हें भी उन्हीं धाराओं में जेल भेज दिया गया है.
इसी प्रकार, भाकपा(माले) जिला सचिव कामरेड जीरा भारती भी मौके पर मौजूद नहीं थीं, लेकिन उन्हें भी नामजद कर दिया गया है.