वर्ष 35 / अंक - 28 / उत्तराखंड में दलित अधिकार सम्मेलन

उत्तराखंड में दलित अधिकार सम्मेलन

उत्तराखंड में दलित अधिकार सम्मेलन

उत्तराखंड एक सवर्ण बाहुल्य राज्य है. आम तौर पर समाज के बहुमत वाला हिस्सा यह प्रचारित करता है कि उत्तराखंड में जातिवाद या जातीय भेदभाव नहीं है. ऊपरी तौर पर, सरसरी नजर से देख कर बहुत सारे लोग इसे सच मान लेते हैं. लेकिन थोड़ा गहराई से पड़ताल करने पर मालूम पड़ता है कि आधुनिकता के बावजूद समाज में जाति और जातीय भेदभाव काफी गहरे तक पैठा हुआ है और कई बार तो यह बेहद विकृत और क्रूर रूप में प्रकट होता है.

बीते दिनों उत्तराखंड के टिहरी जिले के प्रतापनगर ब्लॉक के देवल गांव के नाबालिग दलित युवक केतन लाल की सवर्ण लड़की के साथ प्रेम प्रसंग के चलते बेहद बर्बर तरीके से हत्या कर दी गयी. इसके बाद जिस तरह से हत्यारोपियों के पक्ष में गोलबंदी करने की कोशिश की गयी, वह हैरत में डाल देनेवाला था.

जोशीमठ में तीन साल पहले 2023 में शहर के धंसने के साथ पुनर्वास, विस्थापन और शहर के स्थिरीकरण के लिए जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति की अगुवाई में आन्दोलन चला. सरकार के तमाम दावों के बीच आज तीन साल बाद भी विस्थापन, पुनर्वास के सवाल मुंह बाए खड़े हैं और समाज के सबसे कमजोर तबके के लोग, इसमें सबसे जरूरतमंद हैं.

पिछले दिनों विस्थापन, पुनर्वास के सवाल पर जब जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति ने 48 घंटे के धरने का आयोजन किया तो जाहिर सी बात है कि समाज के कमजोर तबकों की भागीदारी उसमें सबसे ज्यादा थी. विस्थापन, पुनर्वास के सवाल पर आयोजित धरने पर जातिवादी नजरिये से टिपण्णी की गयी और उसे कमजोर तबकों का धरना मानते हुए कतिपय लोगों ने उसमें भागीदारी से परहेज किया.

उत्तराखंड में पिछले कुछ सालों में बढ़ते दलित उत्पीड़न और हिंसा के सवालों पर चर्चा के लिए 30 जून को अम्बेडकर विचार मंच और भाकपा(माले) की ओर से चमोली जिले के मुख्यालय गोपेश्वर में दलित अधिकार सम्मलेन आयोजित किया गया.

इस सम्मलेन में गोपेश्वर, जोशीमठ एवं अन्य स्थानों से उत्साहजनक भागीदारी रही. लगभग चार-साढ़े चार घंटे चले इस सम्मलेन में छात्र, युवा, कर्मचारी महिलाओं एवं राजनीतिक-सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जाति के सवाल पर विस्तार से अपने अनुभव साझा किये और आधुनिक समय में जाति के हर रूप के खात्मे की जरूरत पर बल दिया.

सम्मलेन को संबोधित करने वालों में अम्बेडकर विचार मंच के अध्यक्ष दीपक टम्टा, शिल्पकार सभा के गिरीश चन्द्र आर्य, सुनील कपरवाल, पुष्कर लाल बेच्छवाल, भाकपा(माले) के विनोद शाह, लक्ष्मी देवी, दीप चंद, देवेंद्र राणा, लक्ष्मी देवी, मोहन लाल आर्य, मदन लोहानी, डॉ.  सुमित रिंगवाल, आइसा नेता प्रियंका खत्री, गढ़वाल विश्वविद्यालय छात्र संघ के उपाध्यक्ष शिवांक नौटियाल, सुमित रावत, संदीप, राजेंद्र लाल आदि शामिल थे.

सम्मलेन की प्रस्तावना भाकपा(माले) के गढ़वाल सचिव कॉमरेड अतुल सती ने रखी और मुख्य वक्ता भाकपा(माले) के राज्य सचिव इन्द्रेश मैखुरी थे.

यह तय किया गया कि इस तरह के विचार-विमर्श वाले सम्मेलनों की निरंतरता कायम की जाए और केतन के न्याय की लड़ाई को भी आगे बढ़ाया जाए.


11 July, 2026