वर्ष 34 / अंक-30-31 / सोनम वांगचुक को रिहा करो ! लद्दाख की जनता को राज्...

सोनम वांगचुक को रिहा करो ! लद्दाख की जनता को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की सुरक्षा प्रदान करो!

Release-sonam-wangchuk

मोदी सरकार ने लद्दाख के सुविख्यात पर्यावरण कार्यकर्ता और अन्वेषक सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए जोधपुर (राजस्थान) की जेल में एकांत कारावास में डाल दिया है. उन्हें 24 सितंबर को लेह में हुए पुलिस दमन, जिसमें चार लोग – जिगमत दोर्जे (25), स्टैनिजन नमग्याल (23), रिनचेन दादुल (20), तथा पूर्व कर्मचारी तेवांग थारचिन (46) की मौत हो गई थी और कई अन्य लोग घायल हो गए थे, के बाद गिरफ्तार किया गया. नेपाल में नौजवानों के विद्रोह के बाद जेन जी का हौवा मोदी सरकार को भी सताने लगा है. लद्दाख में दमन और धर-पकड़ की कार्रवाई असंवेदनशीलता, अक्षमता, उद्दंडता और क्रूर दमन को ही उजागर करती है, जो कश्मीर से लेकर मणिपुर और हरियाणा से लेकर बिहार तक पूरे देश में भाजपा शासन के चिन्ह बन गए हैं.

हमलोगों को याद आता है कि सोनम वांगचुक और लद्दाख की जनता ने धारा 370 खत्म किए जाने के बाद की नई व्यवस्था का किस तरह से स्वागत किया था जब जम्मू और कश्मीर के साथ साथ लद्दाख को भी केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया था. लद्दाख के लोगों को आशा थी कि पारिस्थितिक रूप से नाजुक और सामरिक रूप से संवेदनशील इस हिमालयी क्षेत्र को केंद्र शासित प्रदेश बनाने से यहां के स्थानीय निवासियों की दावेदारी बढ़ेगी तथा शक्ति के विकेंद्रीकरण का मार्ग प्रशस्त होगा. लेकिन अनुभवों ने दिखाया कि लद्दाख ने वे शक्तियां भी खो दीं जो उसे पूर्व की व्यवस्था में हासिल थीं. पहले अगर लेह को श्रीनगर ही दूर लगता था, तो अब दिल्ली तो उनमें और ज्यादा दूरी व अलगाव का अहसास करा है. किसी विधायिका के अभाव में केंद्र शासित प्रदेश की स्थिति ने लद्दाख को केंद्र शासित और दूर से नियंत्रित नगरपालिका की हालत में धकेल दिया जिसके पास स्थायी विकास अथवा बेरोजगार स्थानीय नौजवानों को रोजगार देने के लिये कोई भी निर्णयकारी अधिकार नहीं है.

इसीलिए अलग राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूचि के तहत सुरक्षा की मांग लद्दाख की जनता के इसी कड़वे अनुभव से पैदा हुई है. शुरू में भाजपा ने भी लद्दाख को छठी अनुसूची की हैसियत देने का समर्थन किया था. लेकिन जैसे ही बौद्ध-प्रधान लेह और मुस्लिम-बहुल कारगिल में इस मांग पर लोकप्रिय आन्दोलन की शुरूआत हुई और सोनम वांगचुक इस आन्दोलन के सबसे विश्वसनीय व करिश्माई चेहरा के बतौर उभरे, मोदी-शाह निजाम की बोली बंद हो गई और उसने इस मांग पर पूरा नकारात्मक रुख अख्तियार कर लिया. अनेक पर्यावरण उपवासों, सितंबर 2024 में ‘लेह एपेक्स बॉडी’ व कारगिल डेमोक्रैटिक अलायंस के तत्वावधान में लेह-लद्दाख पदयात्रा, और अब इस सितंबर की भूख हड़ताल जैसे बड़े लोकप्रिय आन्दोलनों में जब यह मांग उठने लगी, तो केंद्र सरकार ने इसे पूरी तरह से अनसुनी कर दिया.

लद्दाख की जनता के किसी भी प्रमुख मांग का कोई प्रत्युत्तर न मिलने और शांतिपूर्ण प्रतिवादों से निपटने में की गई पुलिसिया ज्यादतियों   की वजह से ही 24 सितंबर को तोड़फोड़ और हिंसा की वारदात हुई. सोनम वांगचुक ने अराजकता और पूलिस दमन के सामने प्रतिवाद वापस ले लिया, किंतु फिर भी समूचे आन्दोलन को पाकिस्तान, नेपाल और चीन समेत भारत के पड़ोसी मुल्कों द्वारा भड़काई गई ‘विदेशी साजिश’ के बतौर चित्रित किया जा रहा है. इस तथ्य को कि वे पाकिस्तान में आयोजित एक पर्यावरण सम्मेलन में शामिल हुए थे और उनके एनजीओ को ‘खाद्य सुरक्षा’ से संबंधित परियोजनाओं के लिए कुछ विदेशी फंड मिले थे, अब लद्दाख की शांतिपूर्ण जनता को उकसाने वाले ‘विदेशी एजेंट’ के बतौर सोनम की तथाकथित भूमिका का प्रमाण बताया जा रहा है. एक अन्वेषक, जिन्होंने लद्दाख के ठंडे हिमालयी क्षेत्र में तैनात भारतीय सैनिकों के लिए सौर उर्जा से गर्म रहने वाले तंबुओं का डिजाइन बनाया था, को अब भारत का दुश्मन बताया जा रहा है और उन्हें एकांत कारावास में डाल दिया गया है.

मोदी सरकार ने धारा 370 हटाकर जो दुस्साहस किया, उसका नतीजा अब जम्मू व कश्मीर तथा लद्दाख में दिख रहा है. पहलगाम में आतंकी हमले से घाटी को अधिक सुरक्षित बनाने का सरकारी दावा झूठा साबित हो गया. मोदी सरकार की योजनाएं जम्मू, कश्मीर घाटी अथवा लेह और कारगिल में स्थानीय जनता की आकांक्षाओं को रौंदते हुए उस क्षेत्र में कॉरपोरेट लूट को बढ़ावा देने के गिर्द घूम रही हैं. जहां विख्यात लेखकों द्वारा कश्मीर के इतिहास तथा कश्मीर संकट के विभिन्न पहलुओं पर लिखी किताबों को प्रतिबंधित किया जा रहा है, वहीं लद्दाख के चरागाहों को अडानी ग्रुप की तथाकथित हरित ऊर्जा योजनाओं के लिए आरक्षित करने की कोशिश की जा रहा है. घाटी के लोगों के अंदर लंबे समय से मौजूद अलगाव की गहरी भावना अब जम्मू और लद्दाख में भी फैल गई है जहां के लोग अब बिल्कुल ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. धारा 370 हटाये जाने के बाद लद्दाख की जनता के लिए नया अध्याय खुलने की आशा करने वाले तमाम लोगों को आज सोनम वांगचुक की तत्काल निःशर्त रिहाई की मांग करनी चाहिए और अलग राज्य का दर्जा व छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षाओं के लिए लद्दाख की जनता के संघर्षों के पक्ष में खड़ा हो जाना चाहिए.


11 October, 2025