इस 18 दिसम्बर को हम कॉमरेड विनोद मिश्रा की 27वीं शहादत-बरसी पर लाल सलाम और क्रांतिकारी श्रद्धांजलि पेश करते हैं. 1970 के दशक के शुरुआती भयंकर झटके और बिखराव के बाद हमारी प्यारी पार्टी को दोबारा खड़ा करने और संगठित करने से लेकर, 1990 के दशक में संघ-भाजपा के बढ़ते खतरनाक हमलों के चुनौतीपूर्ण दौर का मुकाबला करने के लिए पार्टी को तैयार करने तक – कॉमरेड वीएम ने हमारे लिए एक शानदार, गौरवशाली कम्युनिस्ट विरासत हमारे हवाले की है. उनकी अगुवाई में पार्टी ने संकीर्णतावाद और कट्टरता जैसी कमजोरियों को पीछे छोड़ा, हर तरह की बाधाओं को पार किया, और भारत के इतिहास व समाज को समझने के लिए अपनी मार्क्सवादी समझ को लगातार विकसित व मजबूत करते हुए व्यापक जन-संघर्षों को खड़ा किया. अलग-अलग मोर्चों और परिस्थितियों के अनुरूप पार्टी की नीतियों का ऐसा जीवटता से भरा क्रांतिकारी ढांचा गढ़ा गया, जो गलतियों से सीखता है, हार से ताकत बटोरता है और हर हमले का जवाब देता है.
1989-90 में हमें जो शुरुआती चुनावी कामयाबियां मिली थीं, वे ज्यादा समय तक नहीं टिक सकीं. जल्द ही पार्टी को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा – चुने हुए प्रतिनिधियों का दलबदल, जनसमर्थन में कुछ कमी, और सामंती ताकतों का तेज पलटवार. उस दौर में एक बार फिर कॉमरेड वीएम की अगुवाई में पार्टी ने संगठन को मजबूत करके, जनता के बीच और गहरा रिश्ता बनाकर, और विपक्षी राजनीति में पार्टी की संयुक्त मोर्चा नीति को आगे बढ़ाकर इन चुनौतियों का डटकर मुकाबला किया. आज के नाजुक मोड़ पर हमें इसी बुनियादी ताकत और जुझारूपन को और मजबूती से दोबारा साबित करने की जरूरत है.
हाल के बिहार चुनाव ने एक बार फिर हमें चुनावी राजनीति की टेढ़ी-मेढ़ी राह पर पीछे धकेल दिया गया है. पूरी पार्टी और देश-विदेश में बसे हमारे तमाम शुभचिंतकों ने पूरा साथ दिया, और बिहार में पार्टी ने बेहद जोश और दमखम के साथ चुनावी अभियान चलाया. फिर भी, मोदी सरकार की बेशर्मी से भरी बहुआयामी चुनावी धोखाधड़ी के सामने हम 2020 विधानसभा और 2024 लोकसभा चुनावों में मिली उपलब्धियों को बचा नहीं सके. हमारे वोट लगभग वहीं रहे, लेकिन सीटें 12 से कम सिर्फ 2 रह गईं. इस चुनावी झटके से पार्टी को जरूरी सबक लेने होंगे और और अधिक मजबूत होकर पूरे दमखम के साथ मैदान में वापसी करनी होगी.
दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र और अब बिहार तक एक के बाद एक राज्य चुनावों में मिली जीतों से बेलगाम होकर मोदी सरकार ने पूरे देश में अपने फासीवादी हमलों को तेज कर दिया है. ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) के नाम पर मतदाता सूची से नामों की कटाई की देशव्यापी मुहिम चलाई जा रही है. नए श्रम कानूनों और निजीकृत शिक्षा के जरिए मजदूर तबके और छात्रों पर कॉर्पारेट नियंत्रण को और मजबूत किया जा रहा है. संघीय ढांचे पर हमला तेज हो चुका है, और पूरे देश में साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की खाई को जबरदस्ती और गहरा किया जा रहा है.
इस लड़ाई के मैदान में जैसे-जैसे मुकाबले की घड़ी और तेज हो रही है, हमें आने वाले निर्णायक आंदोलनों के लिए अपनी पूरी ताकत को एकजुट करना होगा. आइए, इस नए साल में हम पार्टी का विस्तार करें, पूरे संगठन को नई ऊर्जा दें, और अपने आंदोलन को और ऊंचाई पर ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार खड़े हों. आने वाले साल में पार्टी संगठन को और अधिक गतिशील, संगठित, अडिग और जुझारू बनाने के लिए हम अपनी हर ताकत झोंक दें और निर्णायक मुकाबले में पूरी ताकत के साथ आगे बढ़ें.