वर्ष 34 / अंक-33 / बाबासाहेब डॉ. अंबेदकर के परिनिर्वाण दिवस पर संगोष्...

बाबासाहेब डॉ. अंबेदकर के परिनिर्वाण दिवस पर संगोष्ठी

बाबासाहेब डॉ. अंबेदकर के परिनिर्वाण दिवस पर संगोष्ठी

संविधान निर्माता बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेदकर के स्मृति दिवस के अवसर पर भाकपा(माले) तथा जन संस्कृति मंच के तत्वावधान में पंडासराय स्थित भाकपा(माले) जिला कार्यालय में ‘आज के परिप्रेक्ष्य में बाबा साहेब अंबेदकर की स्मृति’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित हुई. कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ भाकपा(माले) नेता आरके सहनी तथा संचालन भाकपा(माले) नेता पप्पू पासवान ने की. कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. अंबेदकर की तस्वीर पर पुष्पांजलि से हुई.

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए भाकपा(माले) जिला सचिव कॉ. बैद्यनाथ यादव ने कहा कि यदि बाबासाहेब आज जिंदा होते तो निश्चित ही दलितों-वंचितों, गरीबों-मजदूरों के आंदोलनों के बीच होते. बाबासाहेब के संविधान से हमें नागरिक अधिकार प्राप्त हुए थे. एनडीए की मौजूदा सरकार नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को छीन रही है जिसका सबसे बड़ा उदाहरण बिहार विधानसभा चुनाव है जिसमें एसआइआर के नाम पर लगभग 49 लाख लोगों का नाम मतदाता सूची से काट दिया गया. सरकार बनते ही भाजपा-जदयू ने गरीबों के घर उजाड़ने शुरू कर दिए हैं. बाबासाहेब को सच्चे अर्थों में याद करने का मतलब तमाम तरह के शोषण-दमन व समानता विरोधी विचारधारा के खिलाफ संघर्ष है. भाकपा(माले) इसी दिशा में अग्रसर है. 

वरिष्ठ भाकपा(माले) नेता आरके सहनी ने वर्तमान परिस्थितियों के संदर्भ में डॉ. अंबेदकर के विचारों की प्रासंगिकता पर जोर देते हुए कहा कि आम जनता को समानता  विरोधी विचारधारा के खिलाफ सचेत करना होगा तथा भाजपा-आरएसएस की तमाम दुरभिसंधियों के खिलाफ संघर्ष करना होगा. समानता, आजादी और उपासना की स्वतंत्रता जैसे संवैधानिक मूल्यों को सत्ता द्वारा कुचला जा रहा है. इसके खिलाफ लड़ते हुए संविधान की रक्षा ही बाबासाहेब के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है.

जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रो. सुरेन्द्र सुमन ने कहा कि बाबासाहेब के परिनिर्वाण दिवस के दिन ही साम्प्रदायिक शक्तियों ने बाबरी मस्जिद के ढांचे को गिराया था. यह निम्नजातीय हिंदुओं विशेषकर दलितों-पिछड़ों को समानता के संघर्ष के गौरवपूर्ण इतिहास से काटकर सांप्रदायिकता की आग में झोंकने का ऐतिहासिक षड्यंत्र था, लेकिन अंबेदकर और उनका समानतावादी संघर्ष जनस्मृति में जिंदा है जिसे और आगे बढ़ाना हम सबकी जिम्मेदारी है.

नागरिक मंच के जिला संयोजक अशर्फी राम ने कहा कि दलितों-वंचितों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ सामूहिक घृणा का परिवेश तैयार किया जा रहा है, जिसका नेतृत्व भाजपा-आरएसएस कर रहे हैं. इस बर्बरता, हिंसा और छल-छप्र को पहचानने और ध्वस्त करने के लिए डॉ. अंबेदकर के विचार अत्यंत आवश्यक हैं. 

इस मौके पर ऑल इंडिया लॉयर्स एसोसिएशन के सचिव मिथिलेश सिंह, जसम के राज्य उपाध्यक्ष डॉ. रामबाबू आर्य, कल्याण भारती, हरि पासवान, डॉ. संतोष कुमार यादव, देवेंद्र साह, मयंक कुमार, अमित पासवान, रंजीत कुमार राम, अभिषेक कुमार, जमालुद्दीन आदि ने भी अपनी बातें रखीं. संगोष्ठी में भाकपा(माले) राज्य कमिटी सदस्य शनिचरी देवी, खेग्रामस जिला सचिव सत्यनारायण पासवान, देवेंद्र कुमार, मयंक कुमार, हरि पासवान, विनोद सिंह एक्टू नेता उमेश प्रसाद साह, भोला पासवान सहित दर्जनों लाेगों ने शिरकत की. मौके पर संविधान की प्रस्तावना सामूहिक पाठ कर संविधान व लोकतंत्र को बचाने का संकल्प लिया गया.

13 December, 2025