वर्ष 35 / अंक - 16 / शहादत दिवस पर याद किये गए कॉमरेड गुरूदास चटर्जी

शहादत दिवस पर याद किये गए कॉमरेड गुरूदास चटर्जी

शहादत दिवस पर याद किये गए कॉमरेड गुरूदास चटर्जी

कॉमरेड गुरुदास चटर्जी के 26वें शहादत दिवस पर 14 अप्रैल 2026 को देवली में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया. का. गुरुदास चटर्जी निरसा क्षेत्र से कई बार विधायक रहे, सामाजिक न्याय और मजदूर-किसान आंदोलनों के मजबूत स्तंभ थे. उन्होंने कोयला और भूमि-माफियाओं के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपनी जान न्योछावर कर दी थी. सिंदरी, निरसा और गोविंदपुर से सैकड़ों लोग जुलूस की शक्ल में इस श्रद्धांजलि सभा में पहुंचे.

मुख्य वक्ता भाकपा(माले) के आरा से सांसद का. सुदामा प्रसाद ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि झारखंड आंदोलन में गुरदास चटर्जी की प्रमुख भूमिका रही है. उन्होंने झारखंड में मजदूरों के सवालों पर लड़ने वाले एक निष्पक्ष और ईमानदार नेता के रूप में खुद को स्थापित किया. एक जन प्रतिनिधि के बतौर उन्होंने साधारण और भ्रष्टाचार मुक्त जीवन की शानदार मिसाल पेश की. उन्होंने झारखंड निर्माण के आंदोलन में भी महती भूमिका निभाई. न केवल उनका जीवन, बल्कि उनकी मौत भी इस बात की मिसाल है कि वे एक निर्भीक और जनता के प्रति निष्ठावान नेता थे.

कॉमरेड गुरुदास ने अंतिम सांस तक शोषण के सूक्ष्म रूपों को भी देखने में दिलचस्पी दिखाई थी और उसके खिलाफ संघर्ष छेड़ा था. मजदूर आंदोलनों के साथ ही उन्होंने कोयला से लेकर इस्पात उद्योग तक का लंबा सफर तय किया था और अपने मित्रों व शुभचिंतकों की बड़ी फौज बनाई थी. निरसा हो या धनबाद, बोकारो या रांची या फिर हजारीबाग – हर जगह में किसी न किसी रूप में इसकी अभिव्यक्ति दिख जाती है.

उन्होंने कहा कि पहले का. गुरुदास चटर्जी की हत्या और उसके 5 सालों के अंदर ही कामरेड महेन्द्र सिंह की शहादत – यह कोशिश की गई कि झारखंड से लाल झंडे की ताकत ताकत को खत्म कर दिया जाए. लेकिन, उनका यह मंसूबा कभी पूरा नही होनेवाला.

श्रद्धांजलि सभा को का. गुरूदास चटर्जी के पुत्र और निरसा के विधायक का. अनूप चटर्जी, सिंदरी के विधायक का. चंद्रदेव महतो, भाकपा(माले) के पोलित ब्यूरो सदस्य का. जनार्दन प्रसाद व का. हलधर महतो तथा भाकपा(माले) के जिला सचिव का. वृंदा पासवान ने भी संबोधित किया.

वक्ताओं ने कहा कि झारखड में लाल झंडा की ताकत और मजबूत हुई है. वामपंथ की इस मजबूती से भाजपा सबसे बड़ा खतरा भाजपा और उसके कारपोरेट संगियों – अडानी-अंबानी को है. इस लाल झंडे की सुर्खी में हमारे साथियों के शहादतों की चमक है. इन शहादतों से वामपंथ  कमजोर नहीं, बल्कि और मजबूत ही हुआ है.

सबसे पहले कॉमरेड गुरुदास चटर्जी को मौन श्रद्धांजलि दी गई. सभा की अध्यक्षता कामरेड आनंद महतो और संचालन कार्तिक राम ने की. वामपंथी आंदोलन के अग्रणी नेता गुरुदास चटर्जी की शहादत दिवस के अवसर पर भाकपा(माले) द्वारा राज्यभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए.

रांची के राज्य कार्यालय महेंद्र सिंह भवन में भी श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया जिसमें भाकपा(माले) के राज्य सचिव मनोज भक्त, केंद्रीय कमेटी के सदस्य शुभेन्दु सेन, राज्य कमेटी सदस्य आर्यन सिंह, नंदिता भट्टाचार्य, त्रिलोकी नाथ के साथ कई अन्य साथी भी मौजूद थे.

बोकारो, रामगढ़ और गिरिडीह सहित कई जिलों में आयोजित का. गुरूदास चटर्जी स्मृति आयोजनों में भारी तादाद में पार्टी कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया.



18 April, 2026