पूर्व घोषणा के तहत 25 जून को उत्तर प्रदेश में अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) के बैनर तले महंगाई पर रोक लगाने, ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून के तहत काम देने, न्यूनतम मजदूरी दर बढ़ा कर 729 रु. करने, जबरिया बेदखली पर रोक लगाने, 300 यूनिट फ्री बिजली देने आदि मांगों को लेकर प्रखंड मुख्यालयों पर प्रदर्शन आयोजित हुए.
इन प्रदर्शनों के माध्यम से प्रखंड विकास अधिकारियों (बीडीओ) को मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंप कर मांग की गई कि प्रदेश में मनरेगा की जगह विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत सभी जाॅब कार्ड धारकों को काम दिया जाए एवं 18 वर्ष के ऊपर सभी मजदूरों के लिए जाॅब कार्ड बनाए जाएं. राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी आजीविका मिशन में न्यूनतम मजदूरी 252 रुपये आज के महंगाई के अनुरूप बहुत ही कम है. इसलिए हर हाल में न्यूनतम मजदूरी 729 रुपये दैनिक की गारंटी की जाए.
देश के अन्य राज्यों दिल्ली, पंजाब, कर्नाटक, तमिलनाडु में बिजली दो सौ से तीन सौ यूनिट फ्री कर दी गई है. इसके उलट उत्तर प्रदेश में बिजली महंगी की गई है. स्मार्ट मीटर के माध्यम से भारी बिल वसूला जा रहा है. इसलिए तत्काल बढ़े हुए बिजली के बिल वापस लिये जाएं, स्मार्ट मीटर पर रोक लगाई जाए और उत्तर प्रदेश में भी 300 यूनिट बिजली फ्री की जाए.
माइक्रोफाइनेंस कंपनियों एवं निजी सूदखोरों द्वारा ग्रामीण गरीबों को भारी ब्याज दर पर आरबीआई गाइडलाइन का उल्लंघन करते हुए कर्ज देकर जाल में फंसा लिया गया है. इससे राहत देने के लिए दो लाख रु. तक के कर्ज माफ किए जाएं तथा लेन-देन में आरबीआई गाइडलाइन का अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए.
प्रदेश में सीलिंग, बंजर, परती, आबादी की जमीन पर बसे हुए लोगों को उजाड़ फेंकने के बजाय उन्हें पट्टा आदि देकर विनियमितिकरण किया जाए. ग्रामीण अंचलों में शुद्ध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित कराई जाए.