22 जून 2026 को ‘फासीवादी विरोधी मोर्चा, पंजाब’ में शामिल पार्टियों द्वारा भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र की मोदी सरकार की सांप्रदायिक-फासीवादी चालों और लोगों की रोजी-रोटी पर किए जा रहे घातक हमलों के विरुद्ध पंजाब के सभी जिला मुख्यालयों पर जोरदार रैलियां और विरोध प्रदर्शन किए गए. इन रैलियों और प्रदर्शनों के दौरान संघ-भाजपा की पंजाब विरोधी साजिशों का विरोध करते हुए पंजाब के लंबे समय से लंबित मुद्दों का न्यायपूर्ण समाधान ढूंढने के लिए जोरदार आवाज बुलंद की गई. यह भी मांग की गई कि सिख बंदियों समेत सजाएं पूरी कर चुके और बिना मुकदमा चलाए जेलों में बंद किए गए सभी राजनीतिक नेताओं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और आम नागरिकों को तुरंत रिहा किया जाए. प्रदर्शनों में शामिल कार्यकर्ताओं के हाथों में इन विभिन्न मुद्दों से सम्बंधित नारों वाली तख्तियां और लाल झंडे थे.
विभिन्न जिलों में होनेवाले प्रदर्शनों को संबोधित करने वालों में आरएमपीआई के महासचिव का. मंगत राम पासला, सीपीआई (एम-एल), लिबरेशन के प्रांतीय सचिव का. गुरमीत सिंह बख्तपुर, सीपीआई (एम-एल), न्यू डेमोक्रेसी के प्रांतीय नेता साथी दर्शन सिंह खटकड़, सीपीआई के प्रांतीय सचिव निर्मल सिंह धालीवाल तथा एमसीपीआई (यू) के केंद्रीय नेता साथी किरणजीत सेखों के इलावा इन पार्टियों के प्रांतीय नेता राजविंदर सिंह राणा, पृथ्वीपाल सिंह माड़ीमेघा, प्रगट सिंह जामाराये, जसबीर कौर नत्त, अजमेर सिंह समरा, सुखदर्शन सिंह नत्त, कंवलजीत सिंह, रतन सिंह रंधावा, गोबिंद सिंह छाजली, कुलविंदर सिंह वड़ैच, बंत सिंह बराड़, निरभै सिंह ढुड्डीके, गुलजार सिंह भुंबली, रमिंदर सिंह पटियाला, सतनाम सिंह अजनाला, गुरनाम सिंह भीखी, रघबीर सिंह बैनीपाल, मंगत राम लोंगोवाल, सज्जन सिंह बैंस और प्रेम सिंह भंगू भी शामिल थे.
वक्ताओं ने कहा कि अमेरिका और इजरायल की पिछलग्गू मोदी सरकार की कूटनीति और विदेश नीति लचर व घुटना टेकू है जिससे दुनिया की जनता की नजरों में भारत का सम्मान बुरी तरह गिर गया है. देश के अंदर यह सरकार हर क्षेत्र में जन-विरोधी, लोकतंत्र-विरोधी और काॅर्पाेरेट-परस्त नीतियां लागू कर रही है. इसके द्वारा अमेरिका के साथ किए गए व्यापार समझौतों की शर्तें हमारे कृषि क्षेत्र और खुदरा व्यापार को तबाह करने वाली हैं. दूसरी ओर पंजाब की मान सरकार पंजाब और पंजाबी मजदूरों, किसानों और नौजवानों के हितों की रक्षा करने के बजाय मोदी सरकार की लीक पर चलते हुए जनतांत्रिक संघर्षों पर दमन ढा रही है.
वक्ताओं ने आगे कहा कि देश और दुनिया की पूंजीवादी व्यवस्था आज एक गंभीर आर्थिक मंदी का सामना कर रही है. साम्राज्यवादी हुक्मरान युद्ध छेड़कर और हजारों निर्दाेष लोगों का कत्लेआम करके इस मंदी से निकलना चाहते हैं. यही कारण है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप बिना किसी तर्क-दलील के दूसरे देशों के प्राकृतिक संसाधनों और साधनों पर कब्जा करने के लिए एक के बाद दूसरे देशों के खिलाफ सैन्य हमलों, उनके निर्वाचित शासकों जबरन अगवा करने और आर्थिक नाकाबंदियां लगाने का सहारा ले रहा है. उसी अमरीका की आर्थिक और सैन्य मदद से इजरायल की नस्लवादी नेतन्याहू सरकार ने गाजा पट्टी में योजनाबद्ध तरीके से फिलिस्तीनियों के नस्ली सफाए की मुहिम छेड़ रखी है और वह हिजबुल्लाह से लड़ने की आड़ में लेबनान के इलाकों पर भी कब्जा करना जारी रखे हुए है. पंजाब की बहादुर व न्यायपसंद जनता ऐसे कत्लेआम व जोर-जुल्म का कड़ा प्रतिवाद करती रही है और आगे भी करती रहेगी.
वक्ताओं ने पेपर लीक के खिलाफ संघर्ष और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाए जाने की मांग का जोरदार समर्थन किया तथा पंजाब के नदी जल के मनमाने बंटवारे को रद्द करके रिपेरियन सिद्धांत लागू करने, पंजाबी भाषा को पंजाब और देश में उचित स्थान देने, मजदूरों के काम समय कानूनन 8 घंटे लागू करने, कामगारों की न्यूनतम मजदूरी 26,000 रुपये प्रति माह करने और सभी कृषि उत्पादों की एमएसपी पर खरीद की गारंटी देने जैसी मांगों को भी उठाया.
वक्ताओं ने कहा कि बीजेपी ने एसआईआर की आड़ में लाखों लोगों के जायज वोट काट कर और ईवीएम मशीनों में गड़बड़ी करके बिहार और बंगाल में चुनाव लूटा है. पंजाब की जनता उसके ऐसे हथकंडों से सचेत है. उम्मीद है कि पंजाब में विधानसभा चुनाव में भी जनता उस की वैसी ही गत बनायेगी, जैसे अभी-अभी हुए स्थानीय निकाय चुनावों में बना चुकी है.
– सुखदर्शन सिंह नत्त