पटना 17 अप्रैल 2026 : भाकपा(माले) ने नालंदा जिले में एसआइआर के बाद बनी मतदाता सूची के आधार पर करीब 2.25 लाख जनवितरण प्रणाली लाभार्थियों के नाम राशन कार्ड से हटाने की तैयारी की खबर की कड़ी निंदा की है और इसे गरीब-विरोधी, अन्यायपूर्ण तथा संविधान की भावना के खिलाफ बताया है.
पार्टी ने कहा कि राशन कार्ड किसी भी गरीब परिवार के लिए जीवन और मौत के बीच की सबसे अहम कड़ी है. ऐसे में मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) को आधार बनाकर बड़े पैमाने पर नाम काटना न केवल प्रशासनिक मनमानी है, बल्कि यह लाखों जरूरतमंद परिवारों को भूख और असुरक्षा की ओर धकेलने जैसा कदम है.
कहा कि हाल के दिनों में एसआइआर सूची को ही जाति और निवास प्रमाणपत्र जारी करने का भी आधार बनाया गया है, जो बेहद चिंताजनक है. त्रुटिपूर्ण एसआइआर सूची को मास्टर रिकॉर्ड बनाकर लोगों के बुनियादी अधिकारों से खिलवाड़ किया जा रहा है. सवाल उठता है कि अगर किसी व्यक्ति का नाम SIR सूची में नहीं है, तो क्या वह नागरिक नहीं रह जाता? क्या उसे राशन, पहचान और अन्य अधिकारों से वंचित कर देना न्यायसंगत है?
भाकपा(माले) ने कहा है, ‘एसआइआर सूची के आधार पर राशन कार्ड से नाम हटाने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए. पहले से हटाए गए नामों को अविलंब बहाल किया जाए. पूरी प्रक्रिया की पारदर्शी समीक्षा हो और प्रभावित लोगों को अपील का पूरा अवसर दिया जाए. अगर इस गरीब-विरोधी फैसले को वापस नहीं लिया गया, तो पार्टी राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ेगी और सड़क से लेकर सदन तक इसका जोरदार विरोध करेगी.’