वर्ष 35 / अंक - 04 / तुर्कमान गेट पर हुई बुलडोजर कार्यवाही : कानून की अ...

तुर्कमान गेट पर हुई बुलडोजर कार्यवाही : कानून की अवहेलना और राज्य दमन का मामला है

तुर्कमान गेट पर हुई बुलडोजर कार्यवाही : कानून की अवहेलना और राज्य दमन का मामला है

[ तुर्कमान गेट में हुई बुलडोजर कार्यवाही के बाद, बड़े पैमाने पर हुई गिरफ्तारियों की जांच करने भाकपा(माले), ऐक्टू, ऐपवा, आइसा और आइलाज की संयुक्त जांच टीम दिल्ली के तुर्कमान गेट पहुंची. जांच-पड़ताल के बाद संयुक्त जांच टीम की ओर से श्वेता राज, सुचेता डे और अंजलि ने यह वक्तव्य जारी किया है.]

कानून की अवहेलना और राज्य दमन 

तुर्कमान गेट में हुई बुलडोजर की कार्यवाही उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली के विभिन्न इलाकों तक देश भर में भाजपा के सत्तारूढ़ शासन की ‘बुलडोजर राज’ के बड़े प्रोजेक्ट का ही हिस्सा है. जिसे एक प्रशासनिक प्रक्रिया के रूप में पेश कर उचित ठहराने की कोशिश की जा रही है, वह वास्तव में विशेष समुदायों पर ‘व्यवस्थित’ और ‘योजनाबद्ध’ तरीके से किए गए राज्य दमन का एक पैटर्न है. जांच टीम ने कई स्थानीय निवासियों, कानूनी सलाहकारों, प्रभावित परिवारों और समुदाय के बुजुर्ग सदस्यों से बातचीत की. इस बातचीत से पता चलता है कि इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया की पूरी तरह से अवहेलना की गई है. नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों पर हमला किया गया है तथा जुवेनाइल जस्टिस एक्ट का उल्लंघन किया गया है.

समुदाय के एक बुजुर्ग सदस्य के बयान के मुताबिक  फैज-ए-इलाही मस्जिद परिसर में तीन अलग-अलग हिस्से थे – इबादत की जगह, सामान्य उपयोग/उपयोगिता का स्थान तथा ट्यूशन और सामाजिक क्षेत्र.

उन्होंने बताया – ‘मैंने अपनी छोटी-सी उम्र से देखा है कि यहां हमारे मजहब के कई कार्यक्रम सालों भर होते रहे हैं. यहां सालों से तो दोनों धर्म के लोग काम  करते रहे हैं, यह मसला जमीन का है ही नहीं, वरना अदालत ने 3 दिन का वक्त दिया था तो उसको मानना चाहिए था, उसी दिन रात को 2 बजे ये लोग (पुलिस) तोड़ने के लिए पहुंच गए.’

गंभीर धमकी भरी रणनीतियों का इस्तेमाल करके, राज्य ने स्थानीय विरोध को अदालत तक पहुंचने से पहले ही कुचलने की कोशिश की. रात के दो बजे किए गए ध्वंस का समय एक सोची-समझी चाल थी – ताकि अदालत रोक न लगा सके – जिससे प्रभावी रूप से न्यायिक निगरानी बेकार हो गई. इसके अलावा, इलाके के कमिश्नर का जम्मू-कश्मीर स्थानांतरण, तोड़फोड़ से केवल दो दिन पहले, निवासियों द्वारा जवाबदेही छिपाने की एक रणनीतिक कार्रवाई है. स्थल का दौरा करने पर हमने देखा कि मस्जिद के उस हिस्से को गिरा दिया गया था जिसमें ट्यूशन सेंटर, शादी हॉल और दवाखाना (क्लिनिक) जैसी सुविधाएं थीं.

संविधान द्वारा प्रदत्त कई अधिकारों के गंभीर रूप से उल्लंघन में, जांच टीम को पता चला कि पुलिस ने न केवल तोड़फोड़ को अंजाम देने में मदद की, बल्कि डर और धमकी का माहौल भी बनाया और कोई लोगों को हिरासत में लिया एवं गिरफ्तारियां भी कीं. इनमें नाबालिग किशोर भी शामिल थे. उन्होंने सलीम (बदला हुआ नाम) के घर को निशाना बनाया और उसकी दो बहनों शिफा (15) और फातिमा (11) को जबरन हिरासत में ले लिया, और उन्हें तुर्कमान गेट पुलिस स्टेशन पर लगभग दो घंटे तक रखा. दोनों की मांओं की कई बार विनती के बावजूद, उनके साथ पुलिस स्टेशन जाने की अनुमति नहीं दी गई.

शिफा बताती है, ‘सवाल पूछने ले गए हमको, 1 महिला पुलिस थी और 3 पुरूष, और वो हमको बार-बार यही कह रहे थे कि अपने भाई को बुलाओ, वो आ जाएगा तो तुम दोनों को छोड़ देंगे.’

पुलिस ने उनके भाई को पुलिस स्टेशन लाने में विफल रहने पर उन्हें छोड़ तो दिया, लेकिन उनका फोन जब्त कर लिया, जो अभी तक उन्हें वापस नहीं किया गया है. यह कोई अलग घटना नहीं थी, बल्कि एक व्यापक ‘कैप्चर बाई प्रॉक्सी’ अभियान चलाया गया. बुजुर्ग माता-पिता और बहनों को चारा बनाकर, पुलिस ने युवकों को अपने प्रियजनों की आजादी ‘खरीदने’ के लिए मजबूर किया. इस रणनीति द्वारा राज्य ने एक निश्चित संख्या में कई ‘दंगाई’ गिरफ्तारियों को अंजाम दिया. भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक दबाव के माध्यम से आत्मसमर्पण करवाकर अपराध का एक झूठा नैरेटिव बनाया गया.

वक्फ बोर्ड को आंतरिक रूप से कमजोर करने की कोशिश

इस रिपोर्ट के माध्यम से एक महत्वपूर्ण बात जो हम आपके सामने लाना चाहते हैं, वह है वक्फ बोर्ड को जानबूझकर अंदर से कमजोर करने की कोशिश करना. स्थानीय लोग बताते हैं कि अश्विनी कुमार, जो कमिश्नर के पद पर हैं, वक्फ बोर्ड के प्रशासनिक अधिकारी भी हैं. इस वजह से, एक नामित प्रबंधन समिति होने के बावजूद, बोर्ड ने तोड़फोड़ के खिलाफ याचिका दायर करने में लापरवाही की या पर्याप्त जिम्मेदारी से काम नहीं किया और यहां तक कि इस तोड़फोड़ पर मूक दर्शक बने रहे.

तुर्कमान गेट पर हुए तोड़फोड़ में एक बार फिर एक मुस्लिम बहुल इलाके को निशाना बनाने की कोशिश है, जो सांप्रदायिक घृणा की राजनीति और झूठे नैरेटिव के जरिए समुदाय को फ्रेम करने व बदनाम करने के प्रयास से प्रेरित है. राज्य द्वारा रात 2 बजे तोड़फोड़ करना, अदालती आदेशों को नजरअंदाज करना, नाबालिगों को मोहरे के रूप में इस्तेमाल करना और युवकों के परिवार के सदस्यों को पकड़कर उन्हे फ्रेम करना, ये स्पष्ट करता है कि राज्य का एजेंडा – मुस्लिम समुदाय के साथ दूसरे दर्जे के नागरिक के रूप में व्यवहार करना.

संयुक्त टीम की मांगें

1. किशोर न्याय प्रक्रियाओं के उल्लंघन और गैरकानूनी गिरफ्तारियों व हिरासतों की तत्काल जांच की जाए.
2. सभी गिरफ्तार व्यक्तियों की तत्काल रिहाई हो.
3. वक्फ की स्वायत्तता की बहाली की जाए.
4. नष्ट की गई जन सुविधाओं (ट्यूशन केंद्र, क्लिनिक और सामुदायिक केंद्र) के लिए पूरा मुआवजा दिया जाए.



24 January, 2026